Ram Mandir Controversy: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और आभूषणों की गिनती को लेकर गड़बड़ियों के बाद विवाद गर्माया हुआ है. इस मामले में सख्त तरीके जांच चल रही है. जब देश के किसी भी बड़े धार्मिक स्थल पर प्रबंधन में खामियां मिलती हैं, तब देश के अन्य अमीर मंदिरों और वहां की व्यवस्थाओं पर चर्चा होने लगती है. तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर मंदिर और शिरडी के साईबाबा मंदिर में हर साल करोड़ों श्रद्धालु अरबों रुपये का नकद, सोना और चांदी का दान करते हैं. इतनी भारी-भरकम राशि और दान की वस्तुओं को गिनने के लिए मंदिर प्रशासन ने अलग से व्यवस्था की है. चलिए इसके बारे में जानें.
तिरुपति में किस तरह होती है दान की गिनती?
तिरुमाला पहाड़ियों पर स्थित तिरुपति वेंकटेश्वरा मंदिर में चढ़ावे को गिनने के लिए परकामनी नाम से एक खास और सुरक्षित परिसर बनाया गया है. तेलुगु परंपरा के अनुसर परकामनी का अर्थ दान की सटीक गिनती और उसका लेखा-जोखा करना होती है. साल 2023 से तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने एक नया और हाईटेक परकामनी भवन शुरू किया है. यह एक विशाल वातानुकूलित हॉल है, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होता है. इस भवन में सुरक्षा और पारदर्शिता का स्तर ऐसा है कि कुछ हिस्सों में कांच की दीवारें हैं, ताकि बाहर से आम श्रद्धालु अपनी आंखों से पूरी गिनती को साफ तरीके से देख सकें.
गिनती के लिए तकनीक और मशीनें
मंदिर परिसर में रखे हजारों दानपात्रों को नियमित समय पर पूरी सुरक्षा के साथ खाली किया जाता है. इनको विशेष सीलबंद वाहनों में रखकर सीधे परकामनी भवन लाया जाता है. इस आधुनिक परिसर के भीतर भारतीय करेंसी, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी की छंटाई के लिए पूरी तरह से अलग सेक्शन बनाए गए हैं. नोटों की गिनती के लिए बेहद तेज गति वाली हाई-स्पीड करेंसी काउंटिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है. विदेशी मुद्रा को सीधे अधिकृत बैंकों के माध्यम से जमा कराया जाता है, जबकि सोने और चांदी की शुद्धता की बारीकी से जांच करने के बाद उनकी एक-एक रत्ती का डिजिटल और भौतिर रिकॉर्ड तैयार किया जाता है.
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चंदे की गिनती पर सख्त पहरा
इस गिनती की प्रक्रिया की अनोखी बात यह है कि इसमें केवल सरकारी या मंदिर के वेतनभोगी कर्मचारी ही शामिल नहीं होते हैं, बल्कि परकामनी सेवा के तहत देश भर से चुने गए श्रद्धालु स्वयंसेवक भी हिस्सा लेते हैं. ये स्वयंसेवक बिना किसी वेतन के केवल सेवा भाव के आधार पर अधिकारियों की कड़ी निगरानी में नोटों और सिक्कों की छंटाई करते हैं. परकामनी भवन में प्रवेश करने और वहां से बाहर निकते समय हर व्यक्ति की कई स्तरों पर गहन तलाशी ली जाती है. पूरे परिसर में सैकड़ों की संख्या में हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जो कि हर एक हरकत पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखत हैं.
शिरडी में दान की गिनती
महाराष्ट्र का शिरडी साईबाबा मंदिर भी देश में सबसे ज्यादा चढ़ावा प्राप्त करने वाले प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है. यहां दान की प्रक्रिया भी पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित होती है. मंदिर परिसर में रखे गए सभी दानपात्रों को पूरी तरह से सील करके एक अत्यंत सुरक्षित और सीसीटीवी कैमरों से लैस विशेष कमरे में लेकर जाया जाता है. इन दानपात्रों को खोलने और उनकी गिनती शुरू करने का काम किसी एक व्यक्ति के हाथ में नहीं होता है. पूरी प्रक्रिया के दौरान मंदिर के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि भी अनिवार्य रूप से वहां शामिल होते हैं, ताकि एक-एक पैसे का हिसाब हो सके.
मशीनी गणना से पाई-पाई का हिसाब
शिरडी में भी नोटों की गिनती के लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे हेरफेर की संभावना न के बराबर रह जाती है. दान में मिलने वाले सोने-चांदी, हीरे और अन्य बहुमूल्य आभूषणों के लिए एक अलग इन्वेंटरी रजिस्टर बनाया जाता है, जिसमें उनकी बनावट, वजन और शुद्धता की पूरी जानकारी का हिसाब दिया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया की लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है, जिसे सुरक्षित रखा जाता है.
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