सेहत: रोज़ कितने किलोमीटर चलना फायदेमंद?

रोज़ कितने 1000 स्टेप्स वजन कम करवा ही देंगे? जायेंगे के पहले सेगमेंट में ये भी पता करेंगे कि तेज कदमों से चलना ज्यादा बेहतर है या धीरे धीरे लंबी वॉक करना। लाइफस्टाइल बदलकर गृहमंत्री अमित शाह ने कंट्रोल की अपनी डायबिटीज़ क्या ये तरीका हर डायबिटीज़ मरीज के लिए कारगर हो सकता है? जायेंगे? दूसरे सेगमेंट में और क्या ज्यादा फ्रूट जूस पीने से फैटी लिवर हो सकता है? समझेंगे सेहत के आखिरी सेगमेंट में व्हाट डू यू ब्य शारदा यूनिवर्सिटी? व्हेर दी सॉफ्टवेयर इंजीनियर मीट्स दी गिफ्टेड कंटेंट राइटर दी वर्ल्ड कम्स टूगेदर ऐट शारदा यूनिवर्सिटी। जीस दिन पांच छह या 10,000 कदम चल लो उस दिन बड़ा अच्छा लगता है। मन को भी और शरीर को भी। इतना चलने के बाद थकान नहीं बल्कि ताजगी महसूस होती है और जो कभी सुबह उठकर वक पर निकल गए तो पूरा दिन अक्टिव और एनर्जेटिक महसूस होता है। पर इस चलने से जुड़े कुछ सवाल है, जो अक्सर लोगों के मन में रहते हैं, जैसे रोज़ कितने किलोमीटर या स्टेप्स चलने चाहिए? तेज़ कदमों से धीरे धीरे लंबी वक करें। रोज़ किलोमीटर भर चलने के क्या फायदे होते हैं, सुबह वक करना ज्यादा अच्छा है या शाम को और किन लोगों को लिमिटेड वाकिंग ही करनी चाहिए? सुनिए इन सारे सवालों के जवाब आज सेहत के इस एपिसोड में। बाइट दिल में कम से कम सात सात किलोमीटर यानी 10,000 स्टेप चलना चाहिए और ये नहीं है कि आप डेली हफ्ते में चार बार भी आप ऐसा कर सकते हैं जिससे कि आप स्वच्छ रह सकते हैं। मेरा ये मानना है कि जो भी बिगिनर्स हैं। उनको शुरूआत में स्लो वॉक करना चाहिए और ड्यूरेशनली एट लिस्ट 15220 मिनट्स रखना चाहिए और धीरेधीरे उनको बढ़ाना चाहिए। नो डाउट, ब्रिस्क वॉक ज्यादा फायदेमंद होती है लेकिन आप जब शुरूआत कर रहे हैं तो आप स्लो वॉक से करें। ज़ाहिर सी बात है अगर आप वॉक करते हैं और ब्रिक्स वॉक करते हैं तो आपका वजन भी कम होता है। आपका हार्ट भी मजबूत रहता है, आपकी मांसपेशियां मजबूत रहती हैं, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और काफी आप सवस्थ फील करते हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि जो सुबह की वॉक होती है वो ज्यादा अच्छी होती है। बिकॉज़ शाम की वॉक अगर आप कर रहे हैं तो आप ये मान के चलिए। आप बहुत ज्यादा प्रदूषण झेलेंगे और आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। तो इसमें कोई शक नहीं है कि आप सुबह वॉक करें तो ज्यादा अच्छा है। जिन लोगों को अस्थमा की समस्या है यानी कि सांस की संबंधित प्रॉब्लम है और जिन लोगों को जोड़ों में ज्यादा दर्द रहता है, उन लोगों को लिमिटेड वक ही करनी चाहिए और स्लो वक करनी चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं। तो आप अपने शरीर को अपने जोड़ों को बहुत ज्यादा स्ट्रेन नहीं देते हैं और आपका वक करने का प्रॉपर्टी भी सॉल्व हो जाता है। जी सर डॉक्टर साहब ने कहा आपको रोज़ 10,000 कदम चलने की जरूरत है? हफ्ते में 4 दिन भी इतना चलना काफी होगा। समझे? अब बारी है सेहत के अगले सेगमेंट की। मैं एक मेरे जीवन का अनुभव साझा करने के लिए यहाँ आया हूँ मित्रों, 2020 के मई महीने से आज तक मेरे जीवन में। मैंने बहुत बड़ा परिवर्तन किया है। शरीर को जितनी चाहिए इतनी नींद शरीर को जितनी चाहिए इतना पानी और शरीर को जैसा चाहिए ऐसा आहार और नियमित व्यायाम से। मैंने मेरे जीवन में बहुत कुछ हासिल किया और ये अनुभव को साझा करने के लिए मैं आया हूँ। मैं आपको बता सकता हूँ कि ये 4.5 साल के समय में मैं आज करीब करीब। सभी एलोपैथिक दवा और इंसुलिन से मुक्त होकर आपके सामने खड़ा हुआ। ये है देश के गृह मंत्री अमित शाह। वो वर्ल्ड लिवर डे पर इन्स्टिट्यूट ऑफ़ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में स्पीच दे रही थे। वैसे तो ये वीडियो अप्रैल 2025 का है लेकिन आज कल सोशल मीडिया पर काफी वैरल है। तो हमने सोचा कि क्यों ना अमित शाह के इस वीडियो के बहाने डायबिटीज़, मनेजमेंट और दवाओं की जरूरत पर कुछ अहम सवालों के जवाब जाने जाए। जैसे कि क्या सिर्फ लाइफस्टाइल सुधार कर डायबिटीज़ जैसी बीमारियों को कंट्रोल या रिवर्स किया जा सकता है? क्या हर डायबिटीज़ मरीज? दवाएं या इंसुलिन छोड़ सकता है या ऐसा कुछ चुनिंदा मामलों में ही मुमकिन है? सी के बिरला हॉस्पिटल दिल्ली में इंटरनल मेडिसिन की डायरेक्टर डॉक्टर मनीषा अरोड़ा कहती है। कि जिन मरीजों को टाइप टू डायबिटीज़ हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है अगर वो अपना वजन कम कर ले, हेल्ती टाइट ले, रोज़ एक्सर्साइज़ करे और पर्याप्त नींद ले तो कई मरीज डायबिटीज़ तक पहुँच सकते हैं। यानी उनका ब्लड शुगर लेवल लंबे समय तक नॉर्मल बना रह सकता है। बिना किसी दवा या इंसुलिन के। क्योंकि अच्छी नींद इंसुलिन बढ़ाती है। पर्याप्त पानी शरीर से एक्स्ट्रा ग्लुकोज़ बाहर निकालने में मदद करता है। फाइबर और प्रोटीन से भरपूर खाना शुगर स्पाइक्स कम करता है, इसीलिए डायबिटीज़ में इनसे फायदा मिलता है। पर किसी भी मरीज को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा या इंसुलिन लेना बंद नहीं करना चाहिए, क्योंकि पुरानी लाइफ स्टाइल अपनाने पर खून में शुगर का लेवल फिर से बढ़ सकता है। एक चीज़ और जिन लोगों को टाइप वॅन डायबिटीज़ है, उन्हें जीवन भर इंसुलिन लेना जरूरी होता है क्योंकि उनका शरीर इंसुलिन हार्मोन बनाना बंद कर देता है। वहीं, टाइप टू डायबिटीज़ के वो चुनिंदा मरीज जिनकी बिमारी अभी शुरुआती अवस्था में है और उनके पैंक्रीआस के काम करने की क्षमता अच्छी है वो डॉक्टर से पूछ कर दवाई कम कर सकते हैं। कई मामलों में बंद भी कर सकते हैं, लेकिन जिन मरीजों को लंबे समय से डायबिटीज़ है साथ में किडनी या दिल की गंभीर बिमारी है। जो प्रेग्नेंट है या जिनके शरीर में इंसुलिन बनने की क्षमता कम हो चुकी है, उनके लिए दवाई इंसुलिन बंद करना सेफ नहीं होता। इसीलिए इलाज में कोई भी बदलाव सिर्फ डॉक्टर की सलाह और रेगुलर हेच बीए वॅन सी टेस्ट। और ब्लड शुगर मॉनीटरिंग के आधार पर ही किया जाना चाहिए। वैसे आम तौर पर एक अडल्ट को रोज़ 7-9 घंटे की अच्छी नींद लेनी चाहिए। साथ में हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट मीडियम इंटेंसिटी वाली एक्सर्साइज़ करनी चाहिए। हफ्ते में 2 दिन स्ट्रेंथ या रेसिस्टेंट ट्रेनिंग भी कर सकते हैं। अगर इतनी एक्सर्साइज़ नहीं कर सकते तो खाना खाने के बाद 10 मिनट की सेहत भी ब्लड शुगर कंट्रोल करने में काफी मददगार होती है। वहीं पानी की मात्रा व्यक्ति की उम्र, मौसम और सेहत पर निर्भर करती है। लेकिन नॉर्मल्ली महिलाओं को लगभग दो से ढ़ाई लीटर और पुरुषों को ढ़ाई से 3.5 लीटर पानी पीना चाहिए। हालांकि अगर किडनी की कोई बिमारी है तो पानी की मात्रा डॉक्टर तय करते हैं। आपकी उम्र कुछ भी हो अगर आप आज से ही अपनी सेहत सुधारना चाहते हैं तो सबसे पहले ये चार चीजें करना शुरू कर दें। पहले हर खाने के बाद कम से कम 10 मिनट चले। इससे खाने के बाद बढ़ने वाले ब्लड शुगर को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। दूसरी रोज़ से समय पर 7-8 घंटे की अच्छी नींद और सोने के कम से कम 30 मिनट पहले मोबाइल या स्क्रीन से दूरी बना ले। तीसरी खाने में फाइबर ज्यादा हो और फाइन्ड कार्बोहाइड्रेट कम हो। आप सलाद, फल, दाले और सबुतनक ज्यादा खाएं। चौथी पानी खूब पिए। जितना अभी बताया है उतना अगर आप ये चीज़े करेंगे तो डायबिटीज़ जरूर कंट्रोल हो जाएगी। अब बढ़ते हैं सेहत के आखरी सेगमेंट की तरफ खुराक यानी एक। आपका फेवरिट जूस कौन सा है? मसाबे का, अनार का, सेब का या फिर संतरे का? वैसे लोग केले की स्मूदी और मानगो मिल्क शेक भी खूब पीते हैं। ये सारे टेस्टी भी लगते हैं। अब क्योंकि ये जूस और शेक फलों से बनते हैं इसीलिए लोगों को लगता है कि वो कोई हेल्ती चीज़ पी रही हैं। पर क्या वाकई फलों के जूस हेल्ती होते हैं? नहीं बल्कि इन्हें पीने से तो फैटी लिवर का रिस्क बढ़ जाता है और अगर पहले से ही फैटी लिवर हो तो वो और भी गंभीर हो सकता है। फैटी लिवर यानी लिवर पर फैट जमा होना। जब एक्स्ट्रा फैट लिवर पर जमा होता है तो वो ठीक से काम नहीं कर पाता। धीरे धीरे लिवर सख्त होने लगता है और लिवर फैल होने की नौबत भी आ सकती है। आमतौर पर फैटी लिवर को शराब पीने से जोड़ा जाता है जो ज्यादातर मामलों में सही भी है। पर कभी कभार इसकी वजह ज्यादा फ्रूट जूस पीना भी हो सकता है। कैसे ये हमें बताया? सीनियर डायटेशन और वॅन डाई टुडे की फाउंडर डॉक्टर अनु अग्रवाल ने। डॉक्टर अनु कहती है कि फल खाना अच्छा है, लेकिन फलों का जूस पीने से बचना चाहिए। वरना फैटी लिवर का रिस्क बढ़ सकता है या वो पहले से गंभीर हो सकता है। देखिये फलों में नेचुरल शुगर होती है जिसे कहते हैं इसकी मेटाबोलिज्म और प्रोसेसिंग करने का काम लिवर का होता है। जब आप बहुत ज्यादा फ्रूट जूस पीते हैं या रोज़ रोज़ पीते हैं तो लिवर पर बहुत दबाव पड़ता है। लिवर इस दबाव को या एक्स्ट्रा फ्रक्टोस को संभाल नहीं पाता और उसे फैट में बदलना शुरू कर देता है। फिर ये फैट धीरे धीरे लिवर में जमा होने लगता है जिससे फैटी लिवर हो सकता है। अगर आप रोज़ रोज़ पैकेट वाले जूस पीते हैं तो इनमे अलग से बहुत चीनी डाली जाती है। जो लिवर के लिए और ज्यादा नुकसान दे होती है। इसीलिए फलों का जूस पीने से बेहतर है पूरा फल खाना इसकी वजह भी आपको बता देते हैं जब आप एक पूरा फल खाते हैं जैसे सेब या संतरा तो उसमें खूब फाइबर होता है। इस फाइबर की वजह से फंटो शरीर में धीरे धीरे अब्सॉर्ब होती है, लेकिन जब उसी फल का जूस बनता है तो उसमें। लिवर ना के बराबर बचता है जिससे फ्रक्टोस तेजी से लिवर तक पहुंचती है और नुकसान शुरू कर देती है। इसीलिए साबुत फल खाना हमेशा बेहतर रहता है। इनसे आपको फाइबर, विटामिन और ऐंटीऑक्सीडेंट्स मिलते हैं जो ओवरआल सेहत के लिए काफी अच्छे हैं। खासकर जिन्हें फैटी लिवर है वो बेरीज जैसे ब्लूबेरीज स्ट्रॉबेरीज़। ब्रैसबेरीज़ खा सकते हैं। इनमें भरपूर एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जिन्हें शरीर के सेल्स के लिए अच्छा माना जाता है। आप अमरूद और नाशपाती भी खा सकते हैं। इनसे फाइबर मिलता है जो ब्लड शुगर रेगुलेट करने में मदद करता है। खट्टे फल जैसे संतरा, नींबू और चकोतरा ले सकते हैं। इसी तरह पपीता और तनबूज भी खा सकते हैं। इसके साथ ही अच्छी डाइट लेना, खूब पानी पीना, शराब, सिगरेट छोड़ देना, वजन कंट्रोल करना, स्ट्रेस मैनेज करना और रोज़ कम से कम आधा घंटा एक्सर्साइज़ जरूरी है। इतना कर लिया तो आपका लेवर आपको थैंक यू बोलेंगे। आज सेहत में इतना ही अच्छा अगर आप डॉक्टर है या फिर आपका डॉक्टर से कोई सवाल है तो स्क्रीन पर दिख रही ईमेल आइडी पर डाल दीजिए। सूचना समाप्त, शुक्रिया।