टेस्ट क्रिकेट के वो 5 बल्लेबाज जो सबसे ज्यादा बार हुए शून्य पर आउट

नई दिल्ली. क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है. एक ओर जहां शतकों और रनों की बारिश देखने को मिलती है, तो वहीं दूसरी ओर बल्लेबाजों का बिना खाता खोले पवेलियन लौटना भी इस खेल का एक कड़वा सच है. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में शून्य पर आउट होना यानी ‘डक’ का शिकार होना किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे निराशाजनक पलों में से एक होता है. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि खेल के इस सबसे लंबे और कठिन प्रारूप में कुछ ऐसे दिग्गज खिलाड़ी भी रहे हैं, जिन्होंने विकेटों का अंबार तो लगाया, लेकिन बल्लेबाजी के दौरान शून्य के एक अनोखे और अनचाहे रिकॉर्ड में भी अपना नाम सबसे ऊपर दर्ज करा गए. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा बार ‘डक’ पर आउट होने वाले 5 बल्लेबाजों की लिस्ट में भारत का एक बल्लेबाज भी शामिल है.

वेस्टइंडीज के महान तेज गेंदबाज कर्टनी वॉल्श (Courtney Walsh) ने अपने करियर के दौरान दुनिया भर के बल्लेबाजों के मन में खौफ पैदा किया. साल 1984 से 2001 के बीच वेस्टइंडीज क्रिकेट के स्वर्णिम और ढलते दौर के गवाह रहे वॉल्श ने 132 टेस्ट मैचों की 185 पारियों में गेंदबाजी से तो कई कीर्तिमान रचे, लेकिन बल्लेबाजी में उनके नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज हो गया जिसे कोई भी याद नहीं रखना चाहेगा. वॉल्श अपने पूरे टेस्ट करियर में रिकॉर्ड 43 बार शून्य के स्कोर पर आउट हुए.

5 बल्लेबाज जो टेस्ट मैच में सबसे ज्यादा बार हुए शून्य पर आउट.

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हालांकि, निचले क्रम पर आते हुए उन्होंने 61 बार नाबाद रहकर अपनी टीम को सहारा देने की कोशिश भी की और कुल 936 रन बनाए, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 30 रन रहा. उनका बल्लेबाजी औसत 7.54 का रहा, जो यह साफ करता है कि उनका असली काम विपक्षी टीम के स्टंप्स बिखेरना था, न कि क्रीज पर पैर जमाना. उन्होंने अपने करियर में 77 चौके और 19 छक्के भी लगाए, जो दिखाता है कि जब भी उनका बल्ला गेंद से टकराता था, तो मनोरंजन भरपूर होता था.

स्टुअर्ट ब्रॉड बल्लेबाजी कौशल के बावजूद अनचाही लिस्ट में शामिल

इंग्लैंड के दिग्गज तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड की कहानी इस सूची में सबसे दिलचस्प है. साल 2007 से 2023 तक इंग्लैंड की तेज गेंदबाजी की धुरी रहे ब्रॉड सिर्फ एक पुछल्ले बल्लेबाज नहीं थे. उन्होंने अपने करियर में 167 टेस्ट मैच खेलकर 3662 रन बनाए, जिसमें 13 अर्धशतक और पाकिस्तान के खिलाफ लगाई गई 169 रनों की एक यादगार शतकीय पारी भी शामिल है. इसके बावजूद, लंबे करियर और लगातार बल्लेबाजी आने के कारण उनके नाम टेस्ट इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा ‘डक’ रिकॉर्ड दर्ज है.

ब्रॉड अपने टेस्ट करियर की 244 पारियों में 39 बार शून्य पर आउट हुए. 18.03 के बल्लेबाजी औसत से रन बनाने वाले ब्रॉड ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से 438 चौके और 55 छक्के भी जड़े. शुरुआती करियर में एक बेहतरीन ऑलराउंडर की छवि रखने वाले ब्रॉड के साथ साल 2014 में एक दर्दनाक वाकया हुआ, जब वरुण आरोन की एक बाउंसर सीधे उनके हेलमेट को पार करते हुए चेहरे पर लगी. इस चोट के बाद शॉर्ट पिच गेंदों के खिलाफ उनका डर साफ दिखने लगा, जिसके परिणामस्वरूप उनके करियर के उत्तरार्ध में शून्य की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ.

क्रिस मार्टिन बल्लेबाजी से ज्यादा शून्य के लिए मशहूर

न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज क्रिस मार्टिन की जब भी बात आती है, तो क्रिकेट प्रशंसक उनकी घातक इन-स्विंग गेंदों से ज्यादा उनकी बेहद कमजोर बल्लेबाजी को याद करते हैं. साल 2000 से 2013 के बीच न्यूजीलैंड के लिए 71 टेस्ट खेलने वाले मार्टिन ने 104 पारियों में बल्लेबाजी की और इनमें से 36 बार वे अपना खाता भी नहीं खोल सके. मार्टिन के बल्लेबाजी आंकड़े इतने अनोखे हैं कि उन्होंने अपने पूरे करियर में कुल जितने रन बनाए, उससे कहीं ज्यादा उन्होंने विकेट चटकाए थे.

मार्टिन ने अपने करियर में महज 123 रन बनाए, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 12 रन रहा. उनका टेस्ट बैटिंग औसत महज़ 2.36 का था, जो टेस्ट क्रिकेट इतिहास के सबसे कम औसतों में गिना जाता है. दिलचस्प बात यह है कि वह 52 बार नाबाद लौटे, जिसका मतलब यह था कि अक्सर दूसरे छोर पर विकेट गिर जाते थे या फिर मार्टिन बिना कोई रन बनाए ही पवेलियन लौट जाते थे. उनके पूरे करियर में सिर्फ 15 चौके दर्ज हैं और उन्होंने कभी कोई छक्का नहीं लगाया.

ग्लेन मैक्ग्रा ऑस्ट्रेलियाई महानता के बीच बल्लेबाजी का संघर्ष

ऑस्ट्रेलिया के सर्वकालिक महान तेज गेंदबाजों में शुमार ग्लेन मैक्ग्रा अपनी सटीक लाइन और लेंथ के लिए जाने जाते थे. 1993 से 2007 के बीच ऑस्ट्रेलिया की अजेय टीम का हिस्सा रहे मैक्ग्रा ने 124 टेस्ट मैचों की 138 पारियों में बल्लेबाजी की. गेंदबाजी में बल्लेबाजों को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले मैक्ग्रा बल्लेबाजी के दौरान खुद संघर्ष करते नजर आते थे और अपने करियर में कुल 35 बार शून्य पर आउट हुए.

मैक्ग्रा ने अपने करियर में 7.36 की औसत से 641 रन बनाए. हालांकि, उनके बल्लेबाजी करियर का सबसे खूबसूरत पल साल 2004 में आया जब उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ ब्रिस्बेन टेस्ट में 61 रनों की अर्धशतकीय पारी खेलकर सबको चौंका दिया था. यह उनके करियर का इकलौता अर्धशतक था. उन्होंने अपने करियर में 51 चौके और 1 छक्का भी लगाया, और 51 बार नाबाद रहकर क्रीज पर डटे रहने का जुझारूपन भी दिखाया.

इशांत शर्मा पांचवें नंबर पर काबिज

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे लंबे समय तक तेज गेंदबाजी की कमान संभालने वाले इशांत शर्मा भी इस सूची में शामिल हैं. साल 2007 से 2021 के बीच भारत के लिए 105 टेस्ट खेलने वाले इशांत ने 142 पारियों में बल्लेबाजी की और वह 34 बार शून्य के स्कोर पर आउट हुए. इशांत शर्मा ने अपने टेस्ट करियर में 8.26 की औसत से कुल 785 रन बनाए. मैक्ग्रा की तरह ही इशांत के करियर में भी बल्लेबाजी का एक यादगार लम्हा आया, जब उन्होंने साल 2019 में वेस्टइंडीज के खिलाफ किंग्स्टन में 57 रनों की शानदार अर्धशतकीय पारी खेली थी. निचले क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 88 चौके और 1 छक्का लगाया, साथ ही 47 बार नाबाद भी रहे. भले ही शून्य का यह आंकड़ा उनके नाम के आगे थोड़ा असहज दिखता हो, लेकिन उनके इस जुझारूपन ने कई मौकों पर टीम इंडिया को पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ मिलकर कीमती रन जोड़ने में मदद की.