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आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई सिर्फ हमारे दफ्तर के काम निपटाने या सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रह गया है. यह धीरे-धीरे लोगों के अकेलेपन का साथी और एक ऐसा मंच बनता जा रहा है, जहां लोग अपनी सबसे निजी और भावुक बातें साझा करते हैं.
कई बार यूजर्स अपने तनाव, अवसाद और जीवन की मुश्किलों को किसी इंसान के बजाय चैटबॉट से कहना ज्यादा आसान समझते हैं. इसी बढ़ते रुझान को देखते हुए एआई क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ओपनएआई (OpenAI) एक बेहद संवेदनशील और सुरक्षा केंद्रित फीचर पर काम कर रही है. यह फीचर न केवल यूजर की बातों को सुनेगा, बल्कि संकट के समय एक 'लाइफगार्ड' की तरह काम करते हुए उनके करीबियों को सूचित भी करेगा.
ओपनएआई का यह नया अपडेट 'ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट' (Trusted Contact) के नाम से जाना जाएगा. इसमें एआई यूजर की भाषा और बातचीत के लहजे को बारीकी से परखेगा और अगर उसे किसी अनहोनी या गहरे तनाव का अंदेशा होता है, तो वह तुरंत यूजर के द्वारा चुने गए किसी भरोसेमंद व्यक्ति को अलर्ट भेज देगा. यह तकनीकी दुनिया में सुरक्षा और नैतिकता के एक नए अध्याय की शुरुआत जैसा है.
क्या है यह फीचर और कैसे करेगा काम?
ओपनएआई ने घोषणा की है कि वह ChatGPT में एक ऐसी प्रणाली जोड़ रहा है जहां वयस्क यूजर्स अपने किसी करीबी का नाम और संपर्क जानकारी 'ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट' के रूप में दर्ज कर सकेंगे.
यह फीचर इस तरह काम करेगा
संकेतों की पहचान: जब कोई यूजर ChatGPT से लंबी या बहुत व्यक्तिगत बातचीत करता है, तो एआई के नए 'इवैल्यूएशन मेथड्स' यूजर के व्यवहार और शब्दों में छिपे तनाव (Distress) को पहचानेंगे.
अलर्ट ट्रिगर: अगर एआई को लगता है कि यूजर किसी गंभीर मानसिक संकट में है या उसे अतिरिक्त सहायता की जरूरत है, तो वह तुरंत नामित व्यक्ति को एक नोटिफिकेशन भेज देगा.
विशेषज्ञों की मदद: इस फीचर को विकसित करने के लिए ओपनएआई ने 'काउंसिल ऑन वेल-बीइंग एंड एआई' और डॉक्टरों के एक ग्लोबल नेटवर्क के साथ हाथ मिलाया है.
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क्यों पड़ी इस फीचर की जरूरत?
पिछले कुछ समय में एआई चैटबॉट्स पर कई सवाल खड़े हुए हैं. रिपोर्ट्स और मुकदमों में आरोप लगाया गया है कि एआई के साथ बहुत अधिक व्यक्तिगत और लंबी बातचीत कभी-कभी यूजर्स के मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ सकती है. कुछ मामलों में एआई ने भ्रम (Delusions) या खुद को नुकसान पहुंचाने वाले विचारों को अनजाने में बढ़ावा दिया था. इन चिंताओं को दूर करने के लिए ओपनएआई अब 'रिएक्टिव' (होने के बाद सुधारना) के बजाय 'प्रोएक्टिव' (होने से पहले रोकना) रुख अपना रहा है.
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प्राइवेसी और गोपनीयता पर उठ सकते हैं सवाल
जहां एक ओर यह फीचर सुरक्षा के लिहाज से बेहतरीन है, वहीं दूसरी ओर इसने 'प्राइवेसी' को लेकर बहस छेड़ दी है. कई लोग ChatGPT को एक ऐसी जगह मानते हैं जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी बात कह सकते हैं. ऐसे में किसी तीसरे व्यक्ति (चाहे वह करीबी ही क्यों न हो) को अलर्ट जाना 'गोपनीयता' के उल्लंघन के रूप में देखा जा सकता है. हालांकि, ओपनएआई ने साफ किया है कि यह फीचर पूरी तरह से 'ऑप्ट-इन' (Opt-in) होगा. यानी यह तभी सक्रिय होगा जब यूजर खुद इसे चुनेंगे और किसी को नामित करेंगे.
अन्य सुरक्षा उपाय
ओपनएआई केवल अलर्ट तक ही सीमित नहीं है. कंपनी कुछ और बड़े बदलाव भी कर रही है:
ब्रेक रिमाइंडर्स: अगर आप बहुत देर तक चैट कर रहे हैं, तो एआई आपको ब्रेक लेने की सलाह देगा.
रीजनिंग मॉडल का इस्तेमाल: संवेदनशील बातचीत को अब अधिक उन्नत 'रीजनिंग मॉडल्स' पर रूट किया जाएगा, ताकि एआई अधिक सहानुभूतिपूर्ण और सुरक्षित जवाब दे सके.
हेल्पलाइन रेफरल: संकट के समय एआई तुरंत स्थानीय हेल्पलाइन नंबर (जैसे भारत में उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन) के सुझाव देगा.
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कंपनी काफी पहले से कर रही है इस पर काम
OpenAI ने काफी पहले ही बता दिया था कि उसने ChatGPT के डिफॉल्ट मॉडल को मानसिक तनाव और संवेदनशील स्थितियों में लोगों की बेहतर मदद करने के लिए अपग्रेड किया है. कंपनी के अनुसार अब मॉडल पहले से बेहतर तरीके से पहचान सकता है कि कब कोई यूज़र मानसिक परेशानी, भावनात्मक संकट, आत्महत्या के विचार, साइकोसिस, मेनिया या AI पर अत्यधिक भावनात्मक निर्भरता जैसी स्थिति में है.
इन सुधारों के लिए OpenAI ने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद ली और मॉडल को इस तरह ट्रेन किया कि वह ऐसे मामलों में शांत, सहानुभूतिपूर्ण और सुरक्षित जवाब दे सके, स्थिति को बिगड़ने से रोके और जरूरत पड़ने पर यूज़र को प्रोफेशनल हेल्प या क्राइसिस हेल्पलाइन की ओर मार्गदर्शन करे. कंपनी ने पिछले साल अक्टूबर में बताया था कि उसने तब तक करीब 170 मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से बात की थी.
Conclusion
एआई का उपयोग अब सिर्फ काम-काज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोगों का 'इमोशनल कंपेनियन' भी बनता जा रहा है. ChatGPT का यह नया सुरक्षा फीचर तकनीकी और मानवीय संवेदनाओं के बीच एक पुल बनाने की कोशिश है. हालांकि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि एआई कितनी सटीकता से तनाव के संकेतों को पहचान पाता है और यूजर्स अपनी प्राइवेसी के साथ कितना समझौता करने को तैयार होते हैं.
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