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फीफा में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था ने अपने चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) केविन लामूर के साथ कामकाजी रिश्ता खत्म कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब फीफा अध्यक्ष जियानी इनफैनटिनो की विश्व कप की हिस्सेदारी निवेशकों को बेचने की योजना को लेकर संस्था के भीतर और बाहर तीखा विरोध सामने आया था।
बीबीसी स्पोर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, फीफा ने पुष्टि की कि लामूर के साथ उसका कामकाजी रिश्ता 17 अगस्त 2026 को खत्म हो गया। फीफा के प्रवक्ता ने कहा, 'मुख्य परिचालन अधिकारी के रूप में फीफा और केविन लामूर के बीच कामकाजी रिश्ता 17 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया। फीफा केविन को उनकी दो साल की सेवा के लिए धन्यवाद देता है और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता है।'
कर्मचारियों को ईमेल से दी गई जानकारी
फीफा के महासचिव मैटियास ग्राफस्ट्रॉम ने संगठन के कर्मचारियों को ईमेल भेजकर लामूर के हटने की जानकारी दी। ईमेल में कहा गया कि दोनों पक्षों ने अलग होने पर सहमति जताई है और यह फैसला काफी विचार विमर्श के बाद लिया गया। ईमेल में लिखा था, 'हालिया चर्चाओं के बाद फीफा और हमारे मुख्य परिचालन अधिकारी केविन लामूर ने अलग होने पर सहमति जताई है। यह फैसला सावधानीपूर्वक विचार करने और केविन के प्रति व्यक्तिगत और पेशेवर रूप से पूरे सम्मान के साथ लिया गया है।' ग्राफस्ट्रॉम ने लामूर के योगदान और फीफा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए आभार भी जताया।
लामूर ने कहा था- यह एक व्यक्ति की परियोजना है
लामूर का जाना सीधे तौर पर इनफैनटिनो की उस योजना से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें विश्व कप में निवेशकों को हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव सामने आया था। हालांकि, बाद में कड़े विरोध के बीच इनफैनटिनो ने इस योजना को छोड़ दिया। लामूर ने इस योजना की खुलकर आलोचना की थी और इसे "एक व्यक्ति की परियोजना" बताया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि फीफा प्रशासन को इस योजना को लेकर गुमराह किया गया।
उन्होंने कहा था, 'हमारा मिशन- सैकड़ों जुनूनी, समर्पित और बेहतरीन फीफा कर्मचारियों का मिशन- फुटबॉल की सेवा करना है। एक अध्यक्ष को लोगों को साथ लाना चाहिए, उन्हें एकजुट करना चाहिए और प्रेरित करना चाहिए। आज हम इसके उलट स्थिति का सामना कर रहे हैं।' लामूर को अपनी नौकरी जाने का भी डर नहीं था। उन्होंने साफ कहा था, "अगर इसका मतलब यह है कि मैं अपनी नौकरी खो दूंगा, तो ऐसा ही सही। मैं उस फैसले को समझूंगा और उसका सम्मान करूंगा। कम से कम आज रात मैं चैन की नींद सो पाऊंगा।'
UEFA, AFC और CONCACAF ने भी जताया था विरोध
इनफैनटिनो की योजना को सिर्फ फीफा के भीतर ही विरोध का सामना नहीं करना पड़ा। यूईएफए, एएफसी और कॉनकाकाफ ने भी इस मामले को लेकर विश्व फुटबॉल संस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे। तीनों महासंघों ने फीफा पर भरोसे के बुनियादी उल्लंघन और धोखे का आरोप लगाया था। संयुक्त बयान में कहा गया था कि मामला सिर्फ किसी कारोबारी योजना का नहीं, बल्कि फुटबॉल की अखंडता और उसके नेतृत्व की विश्वसनीयता से जुड़ा है। बयान में कहा गया, 'यह कुछ अधिक बुनियादी चीज के बारे में है: खेल की अखंडता और उन लोगों की अखंडता, जिन्हें इसका नेतृत्व करने के लिए चुना गया है।'
तीनों महासंघों ने आगे कहा था, 'फुटबॉल में नेतृत्व किसी की निजी संपत्ति नहीं है। यह फुटबॉल परिवार की सेवा करने का दायित्व है, जिसने उन्हें जिम्मेदारी सौंपी है। जब धोखे के जरिए भरोसा तोड़ा जाता है और कोई व्यक्ति उस सामूहिक संस्था से ऊपर खुद को रखता है, जिसने उसे अधिकार दिया है, तो वह दायित्व छोड़ दिया जाता है।' लामूर की विदाई ऐसे समय हुई है जब विश्व कप की हिस्सेदारी बेचने की योजना को लेकर फीफा के शीर्ष नेतृत्व पर पहले ही सवाल उठ चुके हैं। अब उनके पद से हटने के बाद इस पूरे विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है।