नानी का मंदिर... मीर यार बलोच बोले, हिंगलाज माता के भक्त बिना डर आएं

बलूच नेता मीर यार बलोच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर कर बलूचिस्तान के हिंगलाज माता मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया है. उन्होंने हिंगलाज माता मंदिर को हिंदू आस्था के साथ-साथ साझी सभ्यता, धार्मिक सौहार्द और आपसी सम्मान का प्रतीक बताया है.

मीर यार बलोच ने अपनी पोस्ट में हिंगलाज माता मंदिर को बलूच लोगों के बीच प्यार से ‘नानी का मंदिर’ कहे जाने का भी जिक्र किया है. उनके अनुसार, हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां भवानी का आशीर्वाद लेने के लिए यहां पहुंचते हैं. श्रद्धालु यहां ‘जय श्री राम’ और ‘जय हिंगलाज माता’ के जयकारे लगाते हैं.

‘बिना डर आएं श्रद्धालु, आप हमारे सम्मानित मेहमान हैं’

मीर यार बलोच ने कहा कि श्रद्धालु बलूचिस्तान के राजमार्गों, सड़कों, रेगिस्तान और पहाड़ों से होकर भरोसे के साथ यात्रा करते हैं. इसकी वजह यह है कि वे किसी विदेशी जमीन पर अजनबी नहीं, बल्कि सम्मानित मेहमान हैं.

बलूच लोगों की मेहमाननवाजी की परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मेहमान एक जिम्मेदारी और सम्मान होता है और उसकी सुरक्षा करना जरूरी है. किसी भी श्रद्धालु को यात्रा के दौरान अपहरण, उत्पीड़न या डराए-धमकाए जाने के भय में नहीं रहना चाहिए.

मीर यार बलोच की पोस्ट में कहा गया है कि हिंगलाज माता मंदिर एक पवित्र स्थान है, जहां हर साल सैकड़ों हजार श्रद्धालु मां भवानी का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं. पोस्ट में कहा गया है कि यहां श्रद्धालु बिना डर अपनी आवाज उठाते हैं और ‘जय श्री राम’ तथा ‘जय हिंगलाज माता’ के जयकारे लगाते हैं.

‘हर धर्म, हर आस्था और हर समुदाय का सम्मान’

मीर यार बलोच ने बलूचिस्तान को प्राचीन सभ्यताओं, विविधता और साथ मिलकर रहने की धरती बताया है. पोस्ट में कहा गया है कि हर धर्म, हर आस्था और हर समुदाय का सम्मान किया जाता है. उन्होंने कहा कि शांति, भक्ति और दोस्ती के साथ आने वाले लोगों के लिए बलूचिस्तान के दरवाजे खुले हैं.

पोस्ट में हिंगलाज माता मंदिर को सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि साझी सभ्यता, धार्मिक सौहार्द, सहनशीलता और आपसी सम्मान का जीवंत प्रतीक बताया गया है. साथ ही हिंदू धर्म की इस पवित्र विरासत की रक्षा करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए यहां स्वतंत्र रूप से और सम्मान के साथ पूजा करने की बात कही गई है.

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हिंगलाज माता मंदिर का होगा विस्तार

मीर यार बलोच की पोस्ट में आने वाले वर्षों में हिंगलाज माता मंदिर के विस्तार और विकास की बात भी कही गई है. इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करना है.

इसके लिए बड़ी पार्किंग, ठहरने की व्यवस्था, बाजार, पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं और जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है. कहा गया है कि इन सुविधाओं से श्रद्धालु और पर्यटक अपनी यात्रा आराम, सम्मान और शांति के साथ पूरी कर सकेंगे.

हिंगोल नेशनल पार्क भी आकर्षण का केंद्र

पोस्ट में हिंगलाज माता मंदिर के अलावा हिंगोल नेशनल पार्क का भी जिक्र किया गया है. इसे बलूचिस्तान के प्रमुख प्राकृतिक खजानों में से एक बताया गया है. यहां पहाड़, रेगिस्तान, नदियां और समुद्र तट की खूबसूरती एक साथ दिखाई देती है. पोस्ट में इसे बलूचिस्तान के असाधारण प्राकृतिक परिदृश्य का हिस्सा बताया गया है.

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51 शक्तिपीठों में क्यों शामिल है हिंगलाज?

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ में माता सती ने योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए थे. इसके बाद भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे. सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के कई खंड किए. मान्यता है कि जहां-जहां माता सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए.

मान्यता के अनुसार, हिंगलाज में माता सती का ब्रह्मरंध्र यानी सिर का ऊपरी भाग गिरा था. इसी वजह से हिंगलाज को 51 प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है. यहां देवी को कोट्टरी या कोट्टवी देवी और भैरव को भीमलोचन के रूप में पूजा जाता है.

‘हिंगलाज’ नाम कैसे पड़ा?

‘हिंगलाज’ नाम की उत्पत्ति हिंगुल शब्द से मानी जाती है. हिंगुल एक लाल रंग का प्राकृतिक खनिज है, जिसे सिनाबार भी कहा जाता है. माना जाता है कि प्राचीन समय में यह खनिज इस क्षेत्र में पाया जाता था. इसी के आधार पर देवी को हिंगुला या हिंगलाज माता कहा जाने लगा.

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भगवान राम से भी जुड़ी है हिंगलाज धाम की मान्यता

स्थानीय धार्मिक परंपराओं और हिंगलाज तीर्थ से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम को रावण वध के कारण ब्रह्महत्या दोष लगा था। ऋषियों ने उन्हें हिंगलाज माता की आराधना करने की सलाह दी.

इसके बाद भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान के साथ इस पवित्र धाम पहुंचे, माता की पूजा की और प्रायश्चित किया. इसी वजह से हिंगलाज धाम को श्रीराम की तपस्या से जुड़े तीर्थ के रूप में भी माना जाता है. हालांकि, यह प्रसंग मुख्य रूप से स्थानीय धार्मिक परंपराओं में मिलता है.

‘आस्था के साथ आएं, बिना डर आएं’

मीर यार बलोच ने अपनी पोस्ट के अंत में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को संदेश देते हुए कहा कि वे बिना डर आएं, आस्था के साथ आएं और सम्मानित मेहमान बनकर आएं.

उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान के लोग खुले दिल से उनका स्वागत करते हैं. पोस्ट का संदेश था—‘हिंगलाज माता में आपका स्वागत है, हिंगोल में आपका स्वागत है और रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान में आपका स्वागत है.’