8 महीने में 22 दोषियों को फांसी की सजा देने वाले जज रवि दिवाकर ने गनर बदलने पर उठाए सवाल, DGP को लिखी चिट्ठी
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रामबाबू मित्तल, मुजफ्फरनगर: वाराणसी के चर्चित ज्ञानवापी मामले से देशभर में सुर्खियों में आए न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में कथित बदलाव को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर कहा कि उनकी सुरक्षा में तैनात गनर कांस्टेबल रविंद्र सिंह ठकुंरैला को बिना उनकी सहमति और सूचना के बदल दिया गया।
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न्यायाधीश के अनुसार शासनादेश और इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। उनका सवाल है कि जब सुरक्षा व्यवस्था व्यक्तिगत तौर पर निर्धारित है तो गनर बदलने का निर्णय बिना जानकारी दिए क्यों लिया गया।
नवंबर 2025 में मुजफ्फरनगर में कार्यभार संभाला
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर पहले वाराणसी के ज्ञानवापी प्रकरण की सुनवाई को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। इसके बाद वह चित्रकूट और बरेली में भी न्यायिक दायित्व निभा चुके हैं। नवंबर 2025 में बरेली से स्थानांतरण के बाद उन्होंने मुजफ्फरनगर में कार्यभार संभाला। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में तैनाती के बाद उनके द्वारा सुनाए गए लगातार सख्त फैसलों ने न्यायिक जगत के साथ-साथ आम लोगों का भी ध्यान खींचा है। सरकारी अधिवक्ता के मुताबिक, नवंबर 2025 में मुजफ्फरनगर आने के बाद अब तक अदालत ने नौ संगीन हत्याकांडों में कुल 22 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
दोषियों को फांसी की सजा सुनाई
सरकारी अधिवक्ता कुलदीप कुमार के अनुसार, इन सभी मामलों में अदालत ने अपराध की गंभीरता, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इन्हें रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी का अपराध माना और दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। इन फैसलों की शुरुआत 6 अप्रैल 2026 को अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड से हुई। इस मामले में सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को मृत्युदंड दिया गया। इसके बाद 28 अप्रैल 2026 को शेखर हत्याकांड में मुकेश, उसके बेटे प्रदीप, संदीप और सोनू को फांसी की सजा सुनाई गई। 30 मई 2026 को राजेश देवी हत्याकांड में दोषी रईस को मृत्युदंड मिला।
20 जून 2026 को राजेंद्र सैनी हत्याकांड में रामकरण उर्फ सावन गिरी और गीलू को फांसी की सजा सुनाई गई। इसके कुछ ही दिन बाद 2 जुलाई को होमगार्ड रतिराम हत्याकांड में दोषी दीपक को मृत्युदंड दिया गया। 6 जुलाई 2026 को राजबीर सिंह हत्याकांड में पूर्व प्रधान प्रमोद कुमार और सहदेव उर्फ पप्पू को फांसी की सजा सुनाई गई। वहीं 17 जुलाई को किसान राजसिंह की लूट के बाद हत्या के मामले में अजित, सूरज उर्फ काला, अनिल और सुनील को मृत्युदंड सुनाया गया।
फांसी की सजा का सिलसिला अगस्त में भी जारी रहा। 12 अगस्त 2026 को सालिम हत्याकांड में शाहनवाज को मृत्युदंड सुनाया गया। इसके अगले ही दिन 13 अगस्त को पवन हत्याकांड में राहुल उर्फ बोसी, हरेंद्र कुमार, रामवीर और राजीव उर्फ छोटू को फांसी की सजा सुनाई गई।सरकारी अधिवक्ता कुलदीप कुमार का कहना है कि ये सभी मामले हत्या जैसे बेहद गंभीर अपराधों से जुड़े थे। अदालत ने प्रत्येक मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और अपराध की गंभीरता का परीक्षण करने के बाद कठोरतम दंड सुनाया।
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