नई दिल्ली| चीनी हमारे और आपके घर में हर रोज उपयोग की जाने वाली मुख्य चीज है। इस बार चीनी की आपूर्ति और कीमतों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। घरेलू बाजारों के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सप्लाई की कमी और कीमतों में तेजी देखी गई है। ग्लोबल मार्केट में कच्ची चीनी की कीमत 16.6 सेंट प्रति पाउंड के आसपास पहुंच गई है, जो एक साल का उच्च स्तर है। वहीं सफेद चीनी के दाम करीब 15 महीने के उच्च स्तर पर हैं।
भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं चीनी के दाम
घरेलू बाजार में चीनी के स्टॉक (Sugar Stock) और कीमतों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सरकार बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है, ताकि आम लोगों को रियायती कीमतों पर चीनी मिलती रहे। हालांकि देश में पिछले 1 महीने के दौरान चीनी की कीमतें करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ी हैं, जबकि जून से अब तक इनमें लगभग 30 फीसदी की तेजी आ चुकी है।
त्योहारी सीजन से पहले कीमतों में उछाल
मुंबई के थोक बाजार में चीनी फिलहाल ₹5,000 से ₹5,090 प्रति क्विंटल के आसपास बिक रही है। जबकि जून के महीने में चीनी का भाव करीब ₹3,800 प्रति क्विंटल थे। कारोबारियों का कहना है कि कम बारिश और आगे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से कीमतों में उछाल देखने को मिला है। इसके साथ ही त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की संभावना ने भी बाजार में तेजी को हवा दी है।
फिजिकल वेरिफिकेशन को लेकर सख्ती
बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने चीनी के स्टॉक की जांच तेज कर दी है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने चीनी मिलों से उन बड़े खरीदारों का ब्योरा मांगा है, जिन्हें वित्त वर्ष 2025-26 में सीधे या एजेंटों के जरिये 500 टन या उससे अधिक चीनी बेची गई थी। विभाग की ओर से विभिन्न राज्यों में किए गए फिजिकल वेरिफिकेशन में कुछ मामलों में पाया गया कि बड़े खरीदारों को बेची जा चुकी चीनी अभी भी मिलों के गोदामों में रखी हुई थी। हालांकि, इस स्टॉक को मिलों द्वारा पी-2 फॉर्म में दी गई जानकारी में नहीं दिखाया गया था।
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सरकार ने फैसला किया है कि किसी डीलर, एजेंट या थोक उपभोक्ता को चीनी बेचने के बाद मिल उस स्टॉक को सात दिन से अधिक अपने परिसर में नहीं रख सकेगी। हालांकि, मिल के कंट्रोल से बाहर की परिस्थितियों में छूट मिल सकती है। यह व्यवस्था 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
रॉ चीनी के इंपोर्ट को भी अपना सकती है सरकार
आने वाले कुछ महीने घरेलू चीनी बाजार के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अक्टूबर के बाद चीनी मिलों में नए सीजन की पेराई शुरू होने और नई चीनी बाजार में आने से आपूर्ति की स्थिति बेहतर हो सकती है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मौसम या मजदूरों की कमी के कारण अक्टूबर के मध्य तक पेराई शुरू नहीं होती है, तो सरकार घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए शून्य शुल्क पर रॉ चीनी के आयात का विकल्प भी अपना सकती है।