Mojtaba Khamenei के ऐलान से दहशत में Trump, Lindsey Graham, Iran hit list, Iran US war updates
प्रतिशोध यह बदला हमारे देश की मांग है और यह बदला लेकर रहेगा। ईरान ईरान की चेतावनी को वेस्टर्न मीडिया ने भी तवज्जो दी और दिखाया भी था कि किस तरह लोग रिवेंज या बदले की मांग करते हुए क्नॉइस। बैनर और लाल झंडे लिए इमाम खान के जनाजे में उमड़े थे। ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह मुस्तबा खान ने भी जनता के नाम अपने पत्र में साफ कह दिया कि खून का बदला खून है और ये जनता खुद चाहती है ऐसा उनका दावा है। इधर अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप कुछ अलग ही मोड़ में चले गए हैं। वो ट्रूप सोशल पर अपने बयानों और अमेरिका में अपने भाषणों में खुद ही बार बार कुछ इस तरह की बातें कर रहे हैं जो उनके खौफ को दिखा रहा है। ऐसा लगता है कि ट्रंप खबरदार मेरे नजदीक मत आना वरना मार दूंगा वाली स्थिति में पहुँच गए हैं। एक्स्पर्ट कहते हैं कि ये डर की अलामत है, डर का प्रतीक है। वेनेज़ुएला के प्रेसिडेंट को तो अमेरिका ने गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन इमाम आयतुल्लाह अली खान ने और उनके साथ कई लोगों की हत्या अमेरिका और इजराइल ने मिलकर कर दी। मौजूदा सिचुएशन में अमेरिकी प्रेसिडेंट के बयान बता रहे हैं की अब अमेरिका के पास बहुत ज्यादा डिप्लोमैटिक रास्ते बचे नहीं है और ईरान। अमेरिका को छोड़ेगा नहीं। ईरान मामलों के जानकार बताते हैं कि दरअसल ईरान भी अपने सुप्रीम लीडर, जिन्हें वहाँ रहबरे मुअज्जम कहा जाता है, इमाम खामने के जनाजे और उन्हें ससम्मान सुपुर्द खाक किये जाने का इंतजार ही कर रहा था। उसके बाद अब वो फ्री हो गया है। और इमाम खामने को सुपर दिखा किए जाने का काम भी उसने अमेरिका के साथ डील के के बीच में निपटा दिया है। अब वैसे भी उसे कोई गरज नहीं है। स्टेट ऑफ़ होर्मस अब भी ईरान के कंट्रोल में है। ईरान ने खुद ऐलान किया है कि उसकी 15,000 मिसाइलें तैनात हैं, तैयार हैं। इस दरमियां ईरान में अमेरिका पर ठीक से काम भी कर लिया है। ऐसे में अमेरिका को अब कुछ समझ आ नहीं रहा है कि ईरान से कैसे भिड़े तो ट्रंप धमकियों दे रहे हैं और ईरान भी बराबरी से अमेरिका को धमका रहा है। लेकिन ईरान से मिल रहे संकेत या इशारे प्रेसिडेंट ट्रंप के टेंशन और भय को बढ़ा रहे हैं। क्योंकि ईरान के पास इस बात का जस्टिफिकेशन है। ये दलील है कि तुमने हमारा लीडर मारा है तो हम भी अपने दुश्मनों के टॉप लीडर मारेंगे। ईरान की तरफ से हिट लिस्ट भी जारी हो गई है। मिनाब के बच्चों की हत्या करने वाले अब शांति से कमरों में नहीं जा पाएंगे। उसने ये ऐलान भी कर दिया है। एक्स्पर्ट कहते हैं कि यहाँ ईरान ने एक मनोवैज्ञानिक या साइकोलॉजिकल बढ़त हासिल कर ली है क्योंकि ट्रंप या तो धमका रहे हैं या फिर कह रहे हैं कि मुझे हाथ मत लगाना। अगर मुझे कुछ हुआ तो इतनी मिसाइल तैयार है, उतनी मिसाइल तैयार है। हम ये कर डालेंगे, हम वो कर डालेंगे। मिडिल ईस्ट के जानकार तो ये भी कहते हैं। इस घबराहट में कहीं ट्रंप कोई घातक कदम न उठा ले क्योंकि ईरान की तरफ से कसम खा ली गई है कि वो अपराधियों और हत्यारों को छोड़ेगा नहीं। तो क्या अमेरिका का चयन गायब कर दिया है? ईरान ने ये बड़ा सवाल है क्योंकि ये हम नहीं कह रहे बल्कि मीडिया रिपोर्ट के हवाले से देखें। तो ये खुद ट्रंप कह रहे हैं, ये मेरी जान को खतरा है। बड़ा सवाल तो ये भी है कि ट्रंप क्या ईरान से लड़ रहे हैं या ईरान के नाम पर पैदा हुए अपने डर से? क्योंकि डरे हुए ट्रंप तबाही का ऐलान कर रहे हैं? ईरान से जंग अमेरिका को कमजोर कर देगी क्या दुनिया की सबसे ताकतवर सेना के हथियार अब खत्म होने लगे हैं और अगर। युद्ध लंबा चला। तो क्या अमेरिका भी ऐसी मुश्किल में फंस सकता है जहाँ से निकलना आसान नहीं होगा? अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प साफ कह चूके हैं कि संघर्ष विराम का दौर खत्म हो चुका है। यानी आने वाले दिनों में हमले और तेज हो सकते हैं। लेकिन ऐसे बीच एक ऐसे रिपोर्ट सामने आई है जिसने अमेरिका के सैन्य ताकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सीएन एन के रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के खिलाफ़ लगातार सैन्य कार्रवाई में अमेरिका अपने सबसे आधुनिक हथियार बड़ी तेजी से इस्तेमाल कर रहा है। हालत ये है कि कई अहम मिसाइलों का स्टॉक अब खतरनाक स्तर तक घट चुका है। सबसे ज्यादा चिंता थार्ड और पेट्रियट जैसी एयर डिफेन्स मिसाइलों को लेकर है। ये वाली सिस्टम है जो दुश्मन की बेलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन इंटरसेप्ट मिसाइलों का करीब आधा भंडार पहले ही इस्तेमाल हो चुका है। वही लंबी दूरी तक इस्तेमाल करने वाली टॉम क्रूज़ मिसाइल का लगभग तिस फीसदी स्टॉक भी खर्च हो चुका है। यानी अगर युद्ध इसी रफ्तार से चलता रहा तो अमेरिका के सामने सिर्फ ईरान ही नहीं। बल्कि भविष्य की दूसरी बड़ी चुनौतियां भी खड़ी हो सकती है। रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही स्थिति कुछ और दिनों तक बनी रही तो हिंद प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की रणनीति बढ़त कमजोर पड़ सकती है। सबसे बड़ी चिंता चीन और उत्तर कोरिया को लेकर है। अगर भविष्य में इन देशों के साथ बड़ा सैन्य संघर्ष हुआ तो अमेरिका के पास उतने हथियार नहीं होंगे। जीतने ऐसे युद्ध के लिए चाहिए। अब सवाल ये है कि अमेरिका नया हथियार कितनी तेजी से बना सकता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक मौजूदा उत्पादन क्षमता के हिसाब से अमेरिका हर महीने से करीब 15 टॉम हॉक। और 20 पैट्रियट मिसाइलें ही तैयार कर पा रहा है। इतना ही नहीं साल 2026 में थर्ड इंटरसेप्टर की नई डेलिवरी भी तय नहीं है। यानी जो हथियार युद्ध में खर्च हो रहे हैं उनकी भरपाई बेहद धीमी रफ्तार से हो रही है। अनुमान है। युद्ध से पहले जितना स्टॉक था, वहाँ तक दोबारा पहुंचने से तीन से 5 साल लग सकते हैं। पूर्व पेंटागन हथियारों का मानना है अमेरिका के कई अहम हथियारों की सप्लाई चैन इतनी जल्दी सामान्य नहीं होगी। वह कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि युद्ध शुरू होने के बाद भी। अमेरिकी कांग्रेस ने मिसाइल उत्पादन बढ़ाने के लिए कोई अतिरिक्त बजट मंजूर नहीं किया है। अलग पेंटागन का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है। अमेरिका अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने में जुटा हुआ है। श्रम प्रशासन ने डिफेंस प्रोडक्शन अक्ट के तहत। मिसाइल निर्माण तेज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही जर्मनी और यूक्रेन जैसे सहयोगी देशों को भी पैट्रिएट मिसाइलों के उत्पादन की अनुमति देने की दिशा में काम किया जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि फॅक्टरी लगाने, उत्पादन बढ़ाने और नए हथियार सेना तक पहुंचाने में कई साल लगेंगे। यानी अगर। युद्ध लम्बा खिच गया तो अमेरिका के सामने सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि भविष्य के बड़े सैन्य मोर्चों पर भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यही वजह है की अब सवाल सिर्फ ये नहीं की ईरान और अमेरिका के बीच जंग कितनी लम्बी होगी बल्कि ये भी है की क्या दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत अपने ही हथियारों की कमी से जूझने लगेंगी? फिलहाल इस रिपोर्ट पर आपकी जो भी राय है कमेंट करके जरूर बताये। बने रहिये हिंदुस्तान के साथ। ईरान और अमेरिका के बीच जंग लगातार तेज होती जा रही है और इसी बीच राजनैतिक विशेषज्ञ और वॉर जर्नलिस्ट व्हाई अल ने कहा है कि ओमान में एक और जहाज पर हमला ये बताता है कि अमेरिका ईरान के साथ शांति समझौते का सम्मान नहीं कर रहा है। अमेरिका की पोल खोलते हुए मिडिल ईस्ट के एक्स्पर्ट। न्यूस एजेंसी ए एन आई को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि क्योंकि अमेरिका शांति समझौते का सम्मान करने से बच रहा है, इसलिए इरानी अपने पड़ोसियों पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ठीक है, अभी एक और जहाज़ पर हमला हुआ और इससे आपको साफ इशारा मिलता है कि अमेरिकी ईरान पर हमले का लेवल बढ़ा रहे हैं। ईरानियों के साथ साइन किए गए समझौते का सम्मान करने का कोई सवाल ही नहीं है और इसीलिए इरानी उन सभी जहाजों पर हमले कर रहे हैं जो अमेरिकियों के बनाए दूसरे रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। अमेरिकी ईरान को दिए गए निर्देशों का भी उल्लंघन कर रहे हैं कि किसी भी जहाज को ऑलमोस्ट स्टेट से गुज़रने से पहले मंजूरी लेनी चाहिए। क्नॉइस इसलिए ये तनाव खत्म होने वाला नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि बड़ी तस्वीर को देखते हैं। बड़ी तस्वीर ये है कि इजराइल अमेरिका को पूरी तरह से युद्ध में धकेल रहा है। इजराइलियों ने इरानी शहरों पर भी हमले किए हैं और ऐसी भी बातें हो रही है कि ईरान पर हमले को इस हद तक बढ़ाने या फिर। सुधारने का सवाल है कि पूरी तरह से युद्ध छिड़ जाए क्योंकि इजराइल के दो मकसद हैं जो पूरे नहीं हुए हैं। ईरान को एक क्षेत्रीय ताकत के तौर पर हटाना और हार्मस स्ट्रेट को पूरी तरह से ब्लॉक करना ताकि इजराइल से होकर तेल के लिए अलग कॉरिडोर बनाने का सवाल है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि इन मकसदों को पूरा होने में ज्यादा समय लगेगा। और हम इलाके में एक लंबी लड़ाई देख रहे हैं।