खर्चा-पानी: अब बैंककर्मियों की बारी? HDFC ने हजारों को निकाला

अगर आप के उम्र 40 साल हुआ, आपने जिंदगी भरी की बैंक की ब्रांच में काम किया हो और अचानक आपको बताया जाए कि अब आपकी जरूरत नहीं है तो आप क्या करेंगे? अगर वजह ये हो कि एक मशीन अब आपसे तेजी से बिना गलती के वही काम कर रही है तो आप किस्से लड़ेंगे। पिछले नौ सालों में पहली बार इंडिया के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक हेच डी ऐफ़ सी बैंक ने अपने एम्पलॉईस की संख्या घटाई है। लोअर लेवल जॉब्स में करीब 8000 लोगों की नौकरी गई है। क्लर्क, कैशियर और बेक ऑफिस स्टाफ की। सवाल ये है क्या ये सिर्फ एक बैंक की कहानी है या ये उस बड़े ट्रेंड का हिस्सा है जो टीसी एस इंफोसिस, ऑरेकल मेटा से होते हुए अब आम आदमी की भरोसेमंद नौकरियों तक पहुँच चुका है? कौन सी नौकरी आ गई है और क्यों? आज इसी पर बात करेंगे और आप देख रहे हैं खर्चा पानी। रॉक्ड टू यू बाय शारदा यूनिवर्सिटी व्हेर थे, सॉफ्टवेयर इंजीनियर मीट्स थे टैलेंटेड फोटोग्राफर दी वर्ल्ड कम्स टूगेदर एट शारदा यूनिवर्सिटी पहले नंबर पर आते। हेच डी ऐफ़ सी बैंक की ऐन्युअल? रिपोर्ट के मुताबिक फाइनैंशल ईयर 2026 में बैंक के टोटल एम्पलॉईस स्ट्रेंथ 3343 से कम हुई और ये पिछले नौ सालों में पहली बार है जब बैंक का स्टाफ घटा हो। लेकिन असली कहानी इस एक नंबर के पीछे छिपी है, बैंक में जिन्हें नॉन सुपरवाइजरी कहा जाता है। यानी। वर्कमैन क्लेरिकल और सबोर्डिनेट स्टाफ उनका नंबर सीधे 8100 से कम हुआ। लोगों की छंटनी सिर्फ इसी एक कैटेगरी में हुई जहाँ नीचे के कैटेगरी से लोग घटे। वही मनेजमेंट सीनियर या मिडिल लेवल मनेजमेंट का हेड काउंट बड़ा सीनियर मनेजमेंट में भी एग्ज़िक्यटिवस 247 से बढ़कर 262 हो गए। इसलिए करीब 3000 नौकरियां नेट कम हुई। पूरी ऑर्गेनाइजेशन में हेच डी ऐफ़ सी बैंक के एमडी और सीई ओह। शशिधर जगदीश ने ऐन्युअल रिपोर्ट में कहा कि जैसे जैसे बैंक, टेक्नोलॉजी, लेद और कस्टमर सेंटर बनने की तरफ बढ़ रहा है, एम्पलॉईस को भी उसी रफ्तार से चलना होगा। उन्होंने कहा कि बैंक जान बूझकर बेक एंड के काम से टैलेंट को कस्टमर फेसिंग रोल की तरफ भेज रहा है, क्योंकि वहाँ टेक्नोलॉजी की मदद से एफिशिएंसी लाई जा सकती है। यानी कम लोगों में ज्यादा काम हो सकता है, आउटपुट ज्यादा आ सकता है, प्रोडक्टिविटी बढ़ सकती है। अब यहाँ एक सवाल बनता है अगर टेक्नोलॉजी सिर्फ बेहतर कर रही है रेप्लस नहीं। तो फिर 8153 क्लेरिकल जॉब्स कहाँ गए? अकेला हेच डी ऐफ़ सी बैंक ये नहीं कर रहा है। एक्सिस बैंक ने भी फनैन्शली और 2026 में करीब 3100 लोगों की वर्क फोर्स घटाई। मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक जे पी मॉर्गन, जे सिटी ग्रुप और स्टैन्डर्ड चार्टर्ड जैसे बैंक्स के एग्ज़िक्यटिवस ने भी ये चीज़ खुलकर कही है कि आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स एआई से आने वाले वक़्त में कुछ रोल्स की जरूरत कम होगी। यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि जब टीसी एस इंफोसिस में लेऑफ्स होते हैं, छंटनी होती है तो हल्ला मचता है, सोशल मीडिया पर बात होती है लेकिन जो 8153 लोग हेच डी ऐफ़ सी से गए हैं उनकी कहानी थोड़ी सी अलग है। की वो तब का है जो ज़िन्दगी में एक ही चीज़ ढूंढ रहा था सिक्योरिटी एक क्लेरिकल बैंक जॉब, एक कैशियर की पोज़ीशन। ये सिर्फ नौकरी नहीं थी। ये एक स्टेबल ज़िन्दगी की गैरॅन्टी थी और इनका एज ग्रुप ज्यादा तर 30 से 40 का है। इनकी एजुकेशन लेवल वो नहीं है जो इन्हें आसानी से रेस्केल होने दे। अब ज़रा सोचिए। आपने अपनी पूरी वर्किंग लाइफ एक ही स्किल सेट पर बनाई है। मैन्युअल प्रोसेसिंग, कॅश हैंडलिंग, फॉर्म वेरिफिकेशन और कोई अचानक कहे की जाओ। ए आई टोल सी को तो ये सिर्फ मर्जी की बात नहीं है। ये एक स्ट्रक्चरल दीवार है। ना वक्त है, ना पैसा है, नई डिग्री लेने का, ना घर की जिम्मेदारी इस उम्र में रुक सकती है और सबसे बड़ी बात। ज्यादातर कंपनी इतना पेशेंस नहीं रखती की किसी को शुरू से दोबारा ट्रैन करे। यही वो जगह है जहाँ ये कहानी टेक कंपनीस में हुए ले ऑफ से बिलकुल अलग हो जाती है। हमने खर्चे पानी के पिछले कुछ एपिसोड में अच्छे से एक्सप्लेन किया है कि जब इन जैसी कंपनीस में छंटनी होती है उसका क्या असर पड़ता है? यहाँ पे कहानी थोड़ी सी अलग है। ये ट्रेंड सिर्फ एक इकोनॉमिक स्टोरी नहीं है, बल्कि एक सोशल स्टोरी भी है। अब ज़रा पीछे चलते हैं और देखते हैं की पैटर्न्स ऑफ़ बैंकिंग तक लिमिटेड नहीं है। टीसी एस ने फाइनैंशल ईयर 2026 में अपनी वर्क फोर्स से 23,000 से ज्यादा एम्पलॉईस घटाएं हैं। दूसरी तरफ इंफोसिस ने। करीब 5000 लोग जोड़े। लेकिन कुल मिलाकर इंडिया के टॉप फाइव आई टी कंपनीस टीसी एस इंफोसिस हेच सी एल टेक विप्रो टेक महेंद्र का कंबाइंड हेड काउंट फाइनैंशल ईयर 2026 में 7389 एम्पलॉईस से घटा है। इ टी टेक के एस्टीमेट के मुताबिक इंडिया की 315 बिलियन डॉलर की टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर सर्विसेज इंडस्ट्री इस साल 25 से 35,000 नौकरियां खत्म कर सकती है। टीम का कहना है कि मई तक ही 10 से 15,000 प्रोफेशनल साइलेंट लेऑफ के जरिए नौकरी गवा चूके। जबकि सील हेच आर सर्विसेज का कहना है कि इस साल करीब 12,000 ले ऑफ पहले ही हो चूके हैं और साल खत्म होने तक टोटल नुकसान 18,000 से 21,000 तक पहुँच सकता है। और सबसे खास बात ये है कि पिछले साल की तरह इस बार कंपनी प्रेस रिलीज़ या एअर्निंग स्कॉल में ले ऑफ का ऐलान नहीं कर रही हैं। इसकी जगह परफॉरमेंस लिंक्ड, एग्ज़िट स्किल बेस्ड रेस्ट्रक्चरिंग और ऑर्गेनाइजेशनल रेडिसाइन के जरिए चुप चाप लोगों को हटाया जा रहा है। इसका मतलब ये है कि हम कंपनी का स्ट्रक्चर बदल रहे हैं। परफॉरमेंस की वजह से निकालना पड़ रहा है। हम चीजों को रेडिसाइन कर रहे हैं इसलिए लोगों की कम जरूरत है ये सब बोलकर। ग्लोबल लेवल पर देखे तो ये पैटर्न और साफ हो जाता है। ओरेकल ने अपनी रेग्युलेटरी फाइलिंग में बताया की पिछले 12 महीनों में उसने करीब 21,000 एम्पलॉईस घटाए हैं और साफ कहा है कि ए आई टेक्नोलॉजी के अडॉप्शन से और डिप्लॉयमेंट की वजह से वर्क फोर्स में कमी आई है और आगे भी आ सकती है। मेटा ने करीब 8000 एम्पलॉईस यानी अपनी वर्क फोर्स का करीब 10% घटाया है। सिस्को ने तो रिकॉर्ड क्वार्टरली रेवइन्यू उनकी जो अर्निंग्स थी, वो बहुत ही अच्छी आई, उसके बावजूद करीब 4000 जॉब्स काटी। अब बात करते हैं उन लोगों की जो अभी करियर शुरू कर रहे हैं। मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम चार बड़ी टेक कंपनीस टीसी, एस कोगनीजंत, एक्सेंचर और ओरेकल ने या तो जो फ्रेश इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स का ऑन बोर्डिंग टाल दिया है या ऑफर पूरी तरह वापस ले लिया है। मिंट के रिपोर्ट में कैंडिडेट्स प्लेसमेंट ऑफीशियल्स और कंपनी कम्यूनिकेशन के हवाले से बताया गया कि टीसी एस और कोगनीजंत के कई रिक्रूट्स रिक्रूट्स मतलब जिन लोगों को कंपनी के लिए चुना गया जिन्होंने महीनों पहले हैरिंग प्रोसेसर क्लियर किया था। अभी भी उन्हें जॉइनिंग डेट नहीं मिली है। वो इंतजार कर रहे हैं। कंपनी इसके वजह बिज़नेस रेक्विरेमेंट और प्रोजेक्ट की डिमॅंड बता रही है। एक्सेंचर के केस में तो हालात और भी बुरे हैं। जिन कैंडिडेट्स ने फाइनल इंटरव्यू क्लियर कर लिया था, उन्हें बताया गया कि जिन रोल्स के लिए उन्होंने इंटरव्यू दिया था, अब उनके लिए जगह नहीं रही। ऑरेकल ने भी इन्टर्नशिप के बाद इंजीनियरिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स को दिए गए ऑफर वापस ले लिए। इसे एक अनअवोइडेबल सरकमस्टैंस बताया। मतलब ऐसी चीज़, ऐसी सिचुएशन जो अचानक से हो गई, हमें पता नहीं कैसे हो गई ये बताया। अब फ्रेशर हैरिंग के ओवरआल नंबर्स देखें और ये शायद सबसे चौंकाने वाला डेटा है। एक्स्फेनो नाम के टैलेंट एनालिटिक्स फॉर्म है। उसके मुताबिक टेक सेक्टर में एंट्री लेवल प्रोफेशनल्स की डिमॅंड यानी 2 साल तक के एक्सपीरियंस वाले मई 2026 में 13,000 से घटकर 10,000 ओपेनिंग्स ही रह गई है। आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं कि इसके सलूशन क्या हो सकते हैं जो व्यक्ति अपने उम्र के ऐसे पड़ाव पर है। या जिसमें इट स्किल्स नहीं है के वहाँ वो रीस्किलिंग और अप स्किलिंग के बारे में सोच नहीं सकता या रीस्किलिंग और अप स्किलिंग उसके पहुँच से बाहर है, तो ऐसे में उस व्यक्ति को क्या करना चाहिए? मुझे लगता है। ऐसे में सबसे अच्छा सलूशन यह है कि वह इंडस्ट्रीज जहाँ पर अभी भी ह्यूमन केन्द्रिक जॉब्स है। एजुकेशन है, हेल्त केयर है, हॉस्पिटालिटी है, टूरिज्म है, कस्टमर केयर है, जहाँ पर पर्सन टु पर्सन कॅाटाक्ट आज भी जरूरी है। भले ही वो फ़ोन पर हो या फिजिकल हो, यही एक सलूशन है उनको वहाँ पर अपने आप को ट्रैन करना चाहिए। इसके लिए तो बहुत फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं चाहिए होती। आपकी अपनी जो इंटरपर स्किल्स जीसको बोलते हैं, उसमें थोड़ा सा सुधार करके ऐसे लोग जो क्लेरिकल काम करते हैं, जो रूटीन काम करते हैं, ऐसे काम करते हैं, जहाँ पर कोई रेसकिलिंग की अब गुंजाइश नहीं, या तो वो काम करें या फिर उनको निकाल दिया जाए। अगर एआई आया या ऑटोमेशन आया। तो उनको निकाल दिया जाएगा। तो अगली बार जब कोई कहे कि ए आई सिर्फ सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की नौकरी खा रहा है तो याद रखिएगा। वहीं ए आई अब उस बैंक क्लर्क की भी नौकरी ले रहा है। टेक इंडस्ट्री में जो लोग निकल रहे हैं उनके पास शायद भी कोई ऑप्शन है लेकिन जो तब का बैंक से इन्षुरेन्स कंपनीस और बेक ऑफिस से निकल रहा है। उनके पास ना डिग्री का ऑप्शन है, ना रे स्किलिंग का वक्त। आप इस बारे में क्या सोचते हैं कि इन लोगों को किस तरह की नौकरियों में अब्सॉर्ब किया जा सकता है? इस सिचुएशन के क्या सलूशन है? हमें कॉमेंट्स में जरूर बताये। आज का खर्चा पानी यही तक अपना ख्याल रखे और देखते शुक्रिया।