डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना (IAF) के वाइस चीफ पद से रिटायर होने के बाद एयर मार्शल नागेश कपूर (रिटायर्ड) ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा एयर फोर्स को तेजस (LCA) फाइटर जेट की डिलीवरी में हो रही देरी की आलोचना की है।
उन्होंने कहा, "ऐसा क्यों है कि जिस मशीन के लिए हमें कई साल पहले कुछ खास क्षमताओं का वादा किया गया था, उसे किसी न किसी बहाने से हमें देने से इनकार किया जा रहा है?" एक न्यूज चैनल को दिए एक इंटरव्यू में अधिकारी ने कहा, "हमें क्यों मुश्किलों का सामना करना पड़े क्योंकि कोई, कहीं अपना वादा पूरा नहीं कर पाया?"
'2030 तक किसी काम का नहीं रहेगा तेजस'
एचएएल की तरफ से भारतीय वायुसेना को स्वदेशी एलसीए तेजस Mk1A जेट की डिलीवरी में कई साल की देरी हुई है। इसकी मुख्य वजहें अमेरिकी जीई कंपनी से F404-IN20 इंजन की सप्लाई में देरी, कॉम्प्लेक्स मिशन सॉफ्टवेयर का वैलिडेशन और वायुसेना की सख्त ऑपरेशनल जरूरतें हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या एडवांस्ड तेजस एमके-2 ऑपरेशन के लिहाज से तब भी काम का होगा जब 2030 के दशक के बीच में बड़ी संख्या में इसे सर्विस में शामिल किया जाएगा। ऐसे समय में जब चीन पहले ही अपने 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट का बेड़ा बढ़ा रहा है तो पूर्व वाइस-चीफ ने कहा, "नहीं, ऑपरेशन के लिहाज से बिल्कुल नहीं।"
बता दें कि चीन 2030 तक 500 5वीं पीढ़ी के जे-20 फाइटर तैनात करने की राह पर है, जबकि भारत अभी भी 4.5-पीढ़ी के तेजस Mk1A के पहले स्क्वाड्रन की डिलीवरी पाने के लिए संघर्ष कर रहा है। हालांकि वायुसेना ने बहुत पहले ही कुल 180 तेजस Mk1A फाइटर जेट का ऑर्डर दे दिया था लेकिन एचएएल को उम्मीद है कि वह मार्च 2027 तक ही पहले 18-25 तेजस Mk1A डिलीवर कर पाएगा।
तेजस की भूमिका को पूरी तरह से खारिज भी नहीं किया
एयर मार्शल कपूर (रिटायर्ड) ने भविष्य में तेजस Mk2 की भूमिका को पूरी तरह से खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा, "आपके पास 5वीं और 6वीं पीढ़ी के कुछ फाइटर जेट हो सकते हैं, लेकिन देश के आकार को देखते हुए आप उन्हें हर जगह तैनात नहीं कर पाएंगे। इसलिए, जो कमियां रह जाएंगी उन्हें इसी श्रेणी के विमानों से पूरा करना होगा।"
उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि तेजस Mk-2 आए और भारत का 5वीं पीढ़ी का AMCA भी आए लेकिन इन्हें बहुत तेजी से आना चाहिए।"
Su-57 के बारे में क्या बोले पूर्व वाइस-चीफ?
जब रूस के 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट Su-57 के बारे में पूछा गया तो पूर्व वाइस-चीफ ने कहा कि जब रूसी फाइटर जेट की तुलना अमेरिकी एफ-35 जैसे पश्चिमी जेट से की जाती है तो पश्चिमी जेट Su-57 से बेहतर साबित होते हैं क्योंकि उनमें बेहतर एवियोनिक्स और स्टील्थ क्षमता होती है।
एयर मार्शल कपूर (रिटायर्ड) ने सुझाव दिया कि भारत को अत्याधुनिक छठी पीढ़ी के प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे यूरोपीय कंसोर्टियम के साथ साझेदारी करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “और भी चीजें हो रही हैं। FCAS में क्यों न शामिल हों? या फिर GCAP में क्यों न शामिल हों?” बता दें कि FCAS यानी 'फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम', फ्रांस, जर्मनी और स्पेन का एक जॉइंट प्रोजेक्ट है। इसका मकसद 2040 तक अगली पीढ़ी का फाइटर जेट, उसके साथ सपोर्ट करने वाले ड्रोन और एक "कॉम्बैट क्लाउड" नेटवर्क तैयार करना है। GCAP यानी 'ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम', यूनाइटेड किंगडम, इटली और जापान का एक जॉइंट प्रोजेक्ट है। इसका लक्ष्य 2035 तक अगली पीढ़ी का फाइटर जेट तैयार करना है।
वायुसेना के पूर्व अधिकारी ने कहा, "आप शायद ऐसे कंसोर्टियम के साथ जा रहे हैं जिसका डिलीवरी और डेवलपमेंट का रिकॉर्ड अच्छा रहा है। जब आपको पता है कि अगली बेहतर चीज के बारे में पहले से ही सोचा जा रहा है तो फिर Gen 4 और Gen 4.5 जैसे चरणों से गुजरने की क्या जरूरत है? क्यों न सीधे उसी अगली चीज से जुड़ें?"
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