कलयुग के अंत को लेकर श्रीमद्भागवत पुराण में लिखी हैं ये बातें, क्या सच होने लगे हैं ये 5 इशारे?

श्रीमद्भागवत पुराण में दुनिया के बनने से लेकर इसके खत्म होने तक की कई हैरान करने वाली बातें बताई गई हैं. इस पवित्र ग्रंथ में कलयुग को लेकर जो भविष्यवाणियां की गई हैं, वे आज हमारे सामने बिल्कुल सच होती दिख रही हैं. 

पुराण कहता है कि जैसे जैसे कलयुग अपने आखिरी दौर में पहुंचेगा, इंसानों का स्वभाव और हमारी कुदरत पूरी तरह बदल जाएगी. आज समाज में जो गिरावट और मौसम में जो बदलाव हम देख रहे हैं.

ये साफ इशारा हैं कि कलयुग का अंत अब ज्यादा दूर नहीं है. आइए जानते हैं पुराण में लिखे उन 5 बड़े इशारों के बारे में, जो आज सच हो रहे हैं.

पैसे और दिखावे का चलेगा राज

भागवत पुराण के मुताबिक, कलयुग के अंत में इंसान की अच्छाई या उसकी काबिलियत की कोई कदर नहीं होगी. समाज में जिसके पास जितना ज्यादा पैसा और दिखावे की ताकत होगी, लोग उसे ही सबसे बड़ा और इज्जतदार मानेंगे. 

आज के दौर में ये बात बिल्कुल सच साबित हो रही है. लोग किसी का अच्छा दिल या ज्ञान नहीं देखते, बल्कि उसका बैंक बैलेंस और रूतबा देखकर उसे सलाम करते हैं. अमीर बनने के लिए लोग आज किसी भी हद तक गिरने को तैयार हैं.

रिश्तों से खत्म हो जाएगा अपनापन

पुराण में साफ लिखा है कि कलयुग के आखिरी समय में शादी जैसे पवित्र रिश्ते सिर्फ एक समझौता बनकर रह जाएंगे. पति पत्नी के बीच का आपसी प्यार और भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा. 

लोग सिर्फ अपने मतलब और स्वार्थ के लिए एक दूसरे के साथ रहेंगे. आज के समय में कोर्ट में बढ़ते तलाक के केस और टूटते परिवार इस बात का सबसे बड़ा सबूत हैं. लोग अब दिल से नहीं, बल्कि अपनी सहूलियत के हिसाब से रिश्ते बना और बिगाड़ रहे हैं.

मौसम का मिजाज होगा पूरी तरह बेकाबू

पुराण में प्रकृति की तबाही को लेकर भी बहुत डरावनी बातें कही गई हैं. इसके अनुसार, कलयुग के अंत में मौसम का चक्र पूरी तरह से बिगड़ जाएगा. कभी ऐसा सूखा पड़ेगा कि जमीन फट जाएगी, तो कभी बेमौसम की भारी बारिश और बाढ़ तबाही मचाएगी. 

इंसान दाने दाने और पानी के लिए तरसेगा. आज ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज के रूप में यह मंजर सबके सामने है. कहीं पीने के पानी का संकट है, तो कहीं अचानक आने वाली आपदाएं हंसते खेलते शहरों को उजाड़ रही हैं.

धर्म की आड़ में बढ़ेगा पाखंड

धार्मिक पतन को लेकर पुराण कहता है कि आखिरी दौर में सच्चे संतों और गुरुओं की भारी कमी हो जाएगी. समाज में ऐसे ढोंगी लोगों का बोलबाला होगा जो सिर्फ गेरुए कपड़े पहनकर या धर्म का चोला ओढ़कर लोगों को बेवकूफ बनाएंगे. 

इनका मकसद सिर्फ अपनी तिजोरियां भरना होगा. आज हम आए दिन ऐसे फर्जी बाबाओं के कारनामे खबरों में देखते हैं, जो धर्म के नाम पर अधर्म का धंधा चला रहे हैं. आम जनता भी सीधे साधे और कपटी इंसान के बीच का फर्क भूलती जा रही है.

काम की बातें: पुराण के अनुसार कलयुग के बुरे असर से बचने के आसान तरीके

हमेशा सच का साथ दें: पुराण कहता है कि हालात चाहे कितने भी बुरे क्यों न हो जाएं, इंसान को कभी भी झूठ और बेईमानी का रास्ता नहीं चुनना चाहिए.

किसी का दिल न दुखाएं: कलयुग के बुरे असर से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपने कर्म अच्छे रखें और कभी किसी कमजोर इंसान को न सताएं.

ईश्वर का सुमिरन: ग्रंथ में साफ लिखा है कि कलयुग के इस दौर में केवल भगवान का सच्चे मन से ध्यान करना ही इंसान को मानसिक शांति दे सकता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित कथाओं, धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित हैं. यह प्रस्तुति केवल पाठकों की रुचि और सूचना के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसका मकसद किसी भी तरह का अंधविश्वास फैलाना नहीं है.)

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