E20 फ्यूल से आपकी गाड़ी का क्या होगा?
एथनॉल यानी इ 20 ने हमारे जीवन में मतलब हमारी गाड़ियों के जीवन में बहुत सारे सवाल लाकर खड़े कर दिए हैं और इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए हम ऑटोमोटिव एक्स्पर्ट से बात करेंगे, लेकिन उससे पहले कुछ बेसिक्स जान लेते हैं, जैसे कि एथनॉल क्या है और ये हमारी गाड़ियों में क्या कर रहा है? एथनॉल बनाने के दो जरिये हैं गन्ना और मक्का एथनॉल एक बायोफ्यूल है यानी जैविक ईंधन, क्योंकि ये बनता है ऐसे सोर्सेज से जो कि नैचुरली उपलब्ध है, जैसे कि पेड़ पौधे या जैविक कचरा। एथनॉल या किसी भी बायोफ्यूल को रिन्यूएबल बताया जाता है, क्योंकि ऐसे सोर्सेज से बनता है जो खत्म नहीं होते। वहीं कोयला, तेल या पेट्रोल डीजल जो है वो फ़ॉसिल फ्युयेल कहलाते हैं क्योंकि वो फ़ॉसिल से बनते हैं। फ़ॉसिल यानी जमीन के नीचे करोड़ों साल पहले जानवरों और पौधों के जो अवशेष होते हैं, उससे जो फ्युयेल बनाया जाता है, फ़ॉसिल फ्युयेल कहलाता है। इसके साथ ही फ़ॉसिल फ्युयेल को कॉ टू जैसी ग्रीनहाउस गैस एमिशन के लिए भी जिम्मेदार बताया जाता है तो एथनॉल को बनाया कैसे जाता है? हमारे देश में जो गन्ने की खेती होती है, उससे जब चीनी बनाई जाती है तो पीछे एक गाड़ा सिरा बचता है जिसे मोलासिस कहते हैं। इसी मोलासिस को सड़ाकर डिस्टिल करके बिल्कुल शुद्ध एथनॉल बनाया जाता है। इसके अलावा जो चावल या मक्के को फर्मेंट करके तैयार होता है वो भी एथनॉल है। यानी सीधे सीधे कहें तो खेतों से निकलने वाला ईंधन एथनॉल कहलाता है। अब बात करते हैं एथनॉल और हमारी गाड़ी के रिश्ते के बारे में तो इ 20 आपने पेट्रोल पम्प्स पे लिखा हुआ देखा होगा आजकल इ से मतलब एथनॉल और 20 मतलब 20% एथनॉल सरकार का प्लान ये है कि गाड़ियों में जो पेट्रोल डलता है वो 80% हो। 20% एथनॉल मिलाया जाए। यहाँ मिलाने का मतलब मिलावट नहीं है। यानी दूध में जीस तरह पानी मिलाते हैं वो नहीं। इसे एथनॉल ब्लेंडिंग कहते हैं। दरअसल सरकार का प्लान था कि 2030 में वो इ 20 एंड एथनॉल की 20% ब्लेंडिंग पेट्रोल में करने की शुरुआत करेगी। लेकिन ये काम उसने 5 साल पहले 2025 में ही शुरू कर दिया और अब 2026 में एथनॉल 20 को पेट्रोल का एक स्टैन्डर्ड वेरिएंट माना जाने लगा है। अब इस इ 20 ब्लाइंडिंग ने लोगों को अलग अलग तरह की चिंताएं दे दी है। जैसे सोशल मीडिया पर सवाल किए जा रहे हैं कि क्या इ 20 से उनकी गाड़ियों में जंग लग जाये? या क्या इ 20 से मिलेज कम होगी या फिर क्या ये उनकी गाड़ियों के लिए कम्पैटिबल है? इन सभी सवालों के जवाब जानने की हम कोशिश करते हैं ऑटोमोटिव एक्स्पर्ट टु टु धवन से अकॉर्डिंग टु रिपोर्ट 2% से ले के 6% तक आपको फ्युयेल एवरेज कम मिलेंगे। इसका मतलब यह है कि इसमें आपको माइलेज कम होगी और टोरकुए ज्यादा मिलेंगे। ऐट दी फैक्ट रिमेन दट दी कंस्यूमर हैज़ बीन इग्नोरेड उसकी बात नहीं मानी गई वो उसको आपने क्रेडिट नहीं दिया। आपने सस्ता पेट्रोल बाजार में लाए हैं? आपने वो क्रेडिट उनको पास ऑन नहीं किया। बट लेट मी ऑल्सो गीव यूएन अशुअरॅन्स? मेरे पास भी दो गाड़ियां हैं, €1 फोर है और €1 सिक्स है। यूरो सिक्स को तो आई कैन असुर के अंदर कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। बट यूरो फोर के अंदर अब ऑलमोस्ट तीन महीने होने वाले हैं। और हमको बिलकुल कोई फर्क नहीं पड़ा, ना मेरे को, ना मेरे बच्चों को, उनके चलानों के अंदर या हमारे ड्राइवर को चलाने के लिए नोबडी है इवन मेन्शन्ड कि वो ना पेट्रोल जो डाल रहे हैं वो ऐटनॉल 20%। डाल रहे हैं कि जो पुरानी गाड़ियां हैं, उनको लेकर आपने एक बात कही थी जो पुरानी गाड़ियां हैं, जो कार्बुरेटर वाली गाड़ियां हैं, जो यूरो €2 वॅन से पहले की जो मैन्युफैक्चर्ड गाड़ियां हैं, उनको आप जब तक तो चलाएंगे तब तक तो ठीक है पर जब उनको आप खड़े कर देंगे। एंड यू अरे नॉट गोइंग टु यूज़ फॉर में बी सिक्स मंथ्स या वॅन ईयर तब उसके अंदर आपको कुछ ना कुछ प्रिवेंटिव मेजर्स देने पड़ेंगे। बिफोर यू पार्क इट अवे तो उसके अंदर आपको पेट्रोल के अंदर कोई लुब्रिकेंट डालना पड़ेगा। अदर्वाइज़ आपने केयरलेस नहीं किया, कुछ काम। तो आपका इंजन चीज़ हो जाएगा और उसके लिए मैं रेकमेंड करता हूँ विथ मैं ओन एक्सपीरियंस ऑफ़ 6065 इयर्स के पेट्रोल के अंदर टूटी आयल जो के अंदर पड़ता था वो डालिए। पॉइंट 05% के हिसाब से ओके तो उसमें आपको उम्मीद है कि ऐसी प्रॉब्लम नहीं होगी। इ 10 वाली गाड़ी है उसमें इ 20 डलवा दिया। कुछ हो तो नहीं जाएगा, इस किस्म की जो चिंताएं हैं उसको लेकर कुछ नहीं होगा, बिल्कुल कुछ नहीं होगा। और कोई उसके अंदर ऐसा पॉइज़न नहीं है जो कि आपका इ 10 वाला इंजन में खराबी हो जाएगी या इ 20 वाले इंजन में खराबी हो जाएगी। कुछ नहीं होगा ऐसा 20% हम एथनॉल डाल रहे हैं, 80% पेट्रोल डाल रहे हैं और कीमत हम पेट्रोल की ही चुका रहे हैं, ये कितना फेयर है? इसको लेकर जो सवाल किए जा रहे हैं सिंपल मैतेमेटिक्स की गवर्नमेंट जो पैसे बचा रही है वो अपने पॉकेट में डाल रही है, आपको पास ऑन नहीं कर रही है। आज जो शोर मच रहा है वो इसी करके मच रहा है। जो गवर्नमेंट ने अपने आप। पैसे दे दिए होते हैं। ऐड दी रिफंड टु दी कॅस्यूमर और साथ में ऑप्शन्ज़ जैसा आपको कि आपके पास नॉर्मल पेट्रोल भी है भी है, वाला भी है तो आपको कोई हंगामा ही नहीं था जो जीसको चाहिए इफ समबडी वांट हिट फ्यूल। तो आप वो वाला डलवा लेगा और उसकी जो गाड़ी इस कम्पैटिबल विथ यूरोपिक टेक्नोलॉजी, जो कि उसको कोई डॅमेज नहीं होगा तो वो वो डलवाएगा और जीसको तकलीफ है कि जिसमें पुरानी टेक्नोलॉजी की गाड़ी है और उसको घबराहट है कि मेरी इंग्लिश में कोई प्रॉब्लम आएगी। या कुछ और प्रॉब्लम आ सकती है तो आपने ना तो उसको कोई पैसे का रिफंड दिया और ऑन टॉप ऑफ़ दट। आप जिंगो कहने में जबरदस्ती की ये पर्टिकुलर लॉ जो 20% जिसमे एस्कॅनल है और उसका आपने कोई हमको प्री लॉन्च का कोई टेस्ट रिपोर्ट नहीं दी। तो देर अरे लॉट ऑफ थिंग्स व्हील्स वीथिन व्हील्स, जो गवर्नमेंट की तरफ से कमजोरी है और अंडरस्टैंडिंग में कमजोरी है। देखिए ये जो जो ये प्रॉब्लम शुरू हुई है, व्यवहार से शुरू हुआ है, ये सिर्फ इसी बात से शुरू हुआ है। आपको मैं ये बताना चाहता हूँ कि साउथ अमेरिका जिसके अंदर मेक्सिको भी आता है, ऊपर से कनाडा है। एशिया के अंदर देखें तो इंडोनेशिया, थाईलैंड यहाँ सब जगह एथनोल वाला फ्युयेल इस्तेमाल करते हैं और जब इस आप कुछ पेट्रोल पंप पे जाते हैं तो आपके पास ऑप्शन में वहाँ पे पूरी मिलती है इफ यू वांट। टू हैव ई 20 फ्यूल यू पे फॉर दैट मच व्हिच इस लेसर थान दी अदर फ्यूल्स और आपको कोई शक है कि आपकी गाड़ी के अंदर खराबी होगी या ऑर यू वॉन्ट मोर पावर ऑर वॉटेवर यू थिंक इस दी रीसन देन यू पे फॉर दैट एंड यू टेक दैट? जो आपने सस्ता पेट्रोल डालने से आपकी कंट्री का इंपोर्ट बिल कम होता है। सो, व्हाटस दी प्रॉब्लम। अब पिछले 40 साल से पिछले 40 साल से ब्राज़ील में ये फ्युयेल इस्तेमाल हो रहा है। एंड देर इस नोबडी हूँ वास् ऑब्जेक्टिंग बट येस यू हॅव दी ऑप्शन्ज़ ऑफ़ बाइंग। ऑदर फ्यूल ऑल्सो। मालिक का थोड़ा सा फरक जरूर पड़ेगा। देर इस नो डाउट बट एड्स की बात करेंगे तो आई डोंट थिंक दे शुड मेक एनी डिफरेंस, थैंक यू सो मच एंड बहुत बहुत शुक्रिया सर थैंक यू।